• Home
  • India
  • Rajasthan
  • Alwar
  • Politics
  • SPORTS
  • ECONOMY
  • Science & Tech
  • Jobs
  • HEALTH
  • Bollywood
  • blog
    September 11, 2025

    ड्रोन से बारिश का मिशन जयपुर में नाकाम: ऊंचाई की लिमिट और देरी से मिली परमिशन बनी बाधा

    जयपुर के रामगढ़ बांध में हाल ही में ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश के प्रयोग पर सवाल उठ रहे हैं। 4 चरणों में 10 बार ड्रोन उड़ाकर क्लाउड सीडिंग करवाई गई। फिर भी बारिश नहीं हो सकी। हालांकि कंपनी दावा कर रही है कि वह 0.8 मिमी बारिश करवाने में सफल रही। एक्सपर्ट का कहना है कि यह प्रयोग गलत समय पर किया गया। इसलिए खास नतीजे नहीं मिले।

    भास्कर ने भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक और संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व मौसम विज्ञान संगठन में स्थायी प्रतिनिधि रहे लक्ष्मण सिंह राठौड़ से इस तकनीक से जुड़े सवालों के जवाब जाने। साथ ही कृत्रिम बारिश का दावा करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि से भी बातचीत की।

    सवाल : राजस्थान में कृत्रिम बारिश के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाई?
    जवाब : कृत्रिम बारिश वैज्ञानिक रूप से संभव है, लेकिन इसे कब और कहां किया जाए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। रामगढ़ बांध के एरिया में जब प्रयोग हुआ, उस समय पूरे प्रदेश में बारिश हो रही थी। जयपुर और रामगढ़ में भी वर्षा हो रही थी। ऐसे में कृत्रिम बारिश करवाने का कोई औचित्य ही नहीं था। चलती ट्रेन को धक्का देने जैसा काम है यह।

    सवाल : कृत्रिम बारिश के लिए ड्रोन तकनीक इस्तेमाल हो रही है, क्या इससे बड़े क्षेत्र में बारिश संभव है?
    जवाब : इस प्रयोग में ड्रोन के इस्तेमाल संदेहास्पद है। क्योंकि ड्रोन से सीमित मात्रा में ही हाइग्रोस्कॉपिक मटेरियल बादलों में छोड़ा जा सकता है। इतने बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए यह तकनीक पर्याप्त नहीं है।

    सवाल : एक कंपनी ने 4 बार प्रयोग किए, विफल क्यों हो रहे हैं?
    जवाब : जिस ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया वो उतनी प्रभावी नहीं है जितना जहाज या हेलिकॉप्टर के माध्यम से क्लाउड सीडिंग होती है। ड्रोन से सीमित मात्रा में ही हाइग्रोस्कॉपिक मटेरियल (बादलों से बारिश करवाने वाला रसायन) बादलों में छोड़ा जा सकता है। इतने बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए यह तकनीक पर्याप्त नहीं है।

    इसके साथ ही जयपुर में ड्रोन 1 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ाया गया। क्लाउड सीडिंग परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम 2 से 4 किलोमीटर की ऊंचाई होनी चाहिए।

    Tags :
    Share :

    Top Stories