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    September 09, 2025

    बारिश से तबाही: खेत डूबे, फसलें गईं; बेबस किसान बोले,अब जीने की वजह नहीं बची

    करौली जिले से पांचना डैम का अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद भरतपुर जिले के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। गंभीरी नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जहां खेतों में खड़ी बाजरा, ज्वार और मिर्च की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।

    इस बार डैम की क्षमता से करीब तीन गुना अधिक पानी छोड़ा गया, जिसने खेतों को डुबो दिया। अभी भी खेतों में दो से तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है – परिवार को कैसे पालें?

    "मन करता है फांसी लगा लूं" – अमर सिंह, किसान

    आमोली गांव, हलैना क्षेत्र के किसान अमर सिंह ने 7 बीघा खेत में बाजरा और ज्वार बोया था। उन्होंने बताया कि भारी पानी भराव से पूरी फसल सड़ चुकी है।

    “बाजरे की फसल पानी में गिर गई और अंकुर फूट गए। अब खेत में कुछ नहीं बचा। सारी मेहनत बर्बाद हो गई। सबसे बड़ा डर ये है कि अब परिवार का पेट कैसे भरूं। मन कर रहा है कि फांसी लगाकर सुसाइड कर लूं।”

    अमर सिंह ने बताया कि उन्होंने खेती पर करीब ₹40,000 का खर्च किया था। फसल अच्छी होती तो 18 से 20 क्विंटल उपज मिलती, जिससे ₹25,000–30,000 का लाभ हो सकता था। लेकिन अब पूरा नुकसान हो गया है।

    "बच्चों को भी खिलाने को कुछ नहीं बचा" – सतीश सिंह, किसान

    बिजवारी गांव के किसान सतीश सिंह ने बताया कि उन्होंने 16 बीघा में बाजरा, ज्वार और तिल की खेती की थी। लेकिन खेतों में डेढ़ से दो फीट पानी भरने से 90% फसल तबाह हो गई।

    “खेत के कुछ हिस्सों में फसल बची है, लेकिन वो भी अब खाने लायक नहीं रही। बच्चों के लिए भी बाजरा नहीं बचा। अब समझ नहीं आ रहा है क्या करें। 10–11 लोगों के परिवार की जिम्मेदारी है और सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़ दिया है।”

    किसानों की मांग: राहत और मुआवज़ा जल्द मिले

    किसानों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। उन्हें सरकार से तत्काल मुआवज़े और राहत पैकेज की उम्मीद है ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और परिवार को भूखा न सुलाना पड़े।

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