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    May 28, 2026

    रोजमर्रा के सामान पर महंगाई की मार, साबुन-शैंपू से लेकर फूड आइटम तक महंगे होंगे

    आने वाले दिनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते खाने-पीने की चीजों और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक-दो महीनों में कई कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में 3% से 7% तक की बढ़ोतरी कर चुकी हैं। इसकी मुख्य वजह रॉ मटीरियल की लागत में करीब 10% तक की बढ़ोतरी बताई गई है।

    अप्रैल में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई, जो मार्च में 3.40% थी। वहीं फूड इन्फ्लेशन भी बढ़कर 4.20% हो गया। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि पैकेजिंग मटीरियल HDPE की कीमतों में 56% तक उछाल आया है। इसी प्लास्टिक का इस्तेमाल शैंपू की बोतल, डिटर्जेंट कंटेनर और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग में किया जाता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 32% तक बढ़ी हैं, जबकि पाम ऑयल 11% महंगा हुआ है।

    कंपनियां लागत बढ़ने की भरपाई के लिए सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि ‘ग्रामेज कट’ यानी पैकेट का वजन कम करने का तरीका भी अपना सकती हैं। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है, जिसमें प्रोडक्ट की कीमत वही रहती है लेकिन मात्रा कम कर दी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत का असर कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर भी दिखाई देगा। मार्च तिमाही में कई बड़ी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण आने वाले समय में उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता और कुल खपत पर भी असर पड़ सकता है।

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